बहुत नाइंसाफी है ये।
हम जैसे लोगों तो कभी पता ही नही चल पाता कि आप अइसा अइसा लिख मारे हैं।
इतना अनमोल रतन कहां छुपाये बइठे थे।
थोडा अडवरटाइज कीजिये साहबान।
खैर अब दिख गया है तो पूरा पढूंगा जी।
लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान । NishikantWorld
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3 Comments
August 10, 2006 at 12:45 pm
बहुत खूब लिखा है सरजी.. पर इसे पूरा करें..
मैं भी कुछ ऐसा लिखने की कोशिश करता हूं.. मेरे पास लिखने के लिये बहुत कुछ है.. पूरे एक साल का exp..
पढते रहें.. राय देते रहें..
राज..
August 10, 2006 at 6:59 pm
बहुत नाइंसाफी है ये।
हम जैसे लोगों तो कभी पता ही नही चल पाता कि आप अइसा अइसा लिख मारे हैं।
इतना अनमोल रतन कहां छुपाये बइठे थे।
थोडा अडवरटाइज कीजिये साहबान।
खैर अब दिख गया है तो पूरा पढूंगा जी।
September 1, 2007 at 9:53 am
लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld
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